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Geet

आ गयी नये साल की रात
आयी मुझको तेरी याद
न आया तुझको मेरा ख्याल
मैने सोची तेरी हर बात
वो साथ बिताये हर एक काल
- ये चाहत मार डालेगी -
- पागलपन जान ले लेगी-


क्यूं न आयी तुझको मेरी याद
क्या थाम लिया तेरा किसी और ने हाथ
कि फिर आयी तुझ पर भरोसे की बात
एक बार करले तू मुझसे बात
ये बेचैनी रहेगी हर बार
-ये चाहत मार डालेगी -
- पागलपन जान ले लेगी -


यही सब सोच रहा था 'फैज़ान'
कि तब तक आ गयी तेरी कॉल
फिर दिल को हो गया मेरे आराम
न आयेगी फिर तुझ पर शक की बात
करता हूँ इसी से नये साल का आग़ाज़
-ये चाहत मार डालेगी -
- पागलपन जान ले लगी-


Written by
Raza M Faizan
Author of the Blog


Written on 1st of Jan 2019

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